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भूकंप से बचाव को लेकर बच्चों को किया गया जागरूक, स्कूलों में चला “सुरक्षित शनिवार” अभियानमुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम के तहत शिवाजीनगर में मॉक ड्रिल और आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण

भूकंप से बचाव को लेकर बच्चों को किया गया जागरूक, स्कूलों में चला “सुरक्षित शनिवार” अभियानमुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम के तहत शिवाजीनगर में मॉक ड्रिल और आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण

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शिवाजीनगर प्रखंड में मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम के तहत जनवरी माह के तृतीय शनिवार को “सुरक्षित शनिवार” का आयोजन पूरे उत्साह और जागरूकता के साथ किया गया। इस बार कार्यक्रम का मुख्य विषय भूकंप से बचाव, आपातकालीन सुरक्षा उपाय और आपदा प्रबंधन रहा। प्रखंड के सभी प्राथमिक, मध्य और उत्क्रमित विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को भूकंप के दौरान अपनाई जाने वाली सावधानियों, सुरक्षित व्यवहार और आपदा के बाद रेस्क्यू व प्राथमिक उपचार के तरीकों की जानकारी दी गई।

जानकारी के अनुसार, 15 जनवरी से 29 जनवरी 2026 तक भूकंप सुरक्षा पखवाड़ा मनाया जा रहा है। इसी के तहत शनिवार को सभी विद्यालयों में विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया, जिसमें बच्चों को सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ मॉक ड्रिल के माध्यम से व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। सुरक्षित शनिवार के वार्षिक कैलेंडर के अनुसार जनवरी माह के तृतीय शनिवार को भूकंप से बचाव के प्रति चेतना जागृत करना और बच्चों को आपदा के समय स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए तैयार करना मुख्य उद्देश्य था।

भूकंप से बचाव को लेकर बच्चों को किया गया जागरूक, स्कूलों में चला “सुरक्षित शनिवार” अभियानमुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम के तहत शिवाजीनगर में मॉक ड्रिल और आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण

कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने बच्चों को समझाया कि भूकंप जैसी आपदा अचानक आती है, इसलिए घबराने के बजाय सतर्क और शांत रहना सबसे जरूरी है। छात्रों को बताया गया कि भूकंप आने पर यदि संभव हो तो तुरंत खुले और सुरक्षित स्थान पर चले जाना चाहिए। यदि बाहर निकलना संभव न हो तो मजबूत टेबल, चौकी या पलंग के नीचे बैठकर सिर को सुरक्षित रखना चाहिए। साथ ही अलमारी, पंखा, शीशा या भारी वस्तुओं के पास खड़े होने से बचने की सलाह दी गई।

मॉक ड्रिल के दौरान छात्रों को “ड्रॉप, कवर एंड होल्ड” तकनीक का अभ्यास कराया गया। शिक्षकों ने यह भी बताया कि भूकंप के बाद बाहर निकलते समय टूटे हुए बिजली के तारों, गिरी हुई दीवारों और मलबे से दूर रहना चाहिए। इसके अलावा, घायल व्यक्ति को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने और प्राथमिक उपचार देने के तरीकों की जानकारी दी गई, जिसमें मामूली चोटों पर पट्टी बांधना, रक्तस्राव होने पर दबाव देना और गंभीर स्थिति में तुरंत मदद बुलाना शामिल था।

इस अभियान में “क्या करें और क्या न करें” पर विशेष जोर दिया गया। बच्चों को अफवाहों से बचने, शिक्षकों और अभिभावकों के निर्देशों का पालन करने और आपदा के समय एक-दूसरे की मदद करने के लिए प्रेरित किया गया। शिक्षकों ने वास्तविक जीवन के उदाहरण देकर समझाया कि थोड़ी सी सतर्कता बड़ी दुर्घटना को टाल सकती है।

यह कार्यक्रम उत्क्रमित मध्य विद्यालय कलवाड़ा, प्राथमिक विद्यालय कनखरिया, जगदर, पुरन्दाही, बंधार, गोसाई पोखर, उत्क्रमित मध्य विद्यालय रजोर, उत्क्रमित मध्य विद्यालय रामभद्रपुर, चितौरा बेला, शंकरपुर, मधुरापुर तथा मध्य विद्यालय रानीपरती सहित प्रखंड के सभी सरकारी एवं निजी विद्यालयों में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में पूर्व बीआरपी सह प्रधानाध्यापक बालमुकुंद सिंह, एचएम सतनारायण आर्य, अरुण पासवान, प्रमोद पासवान, प्रदीप कुमार, सुभाष सिंह, संतोष कुमार, नीलू कुमारी, रामनाथ पंडित, हीरानंद झा, अवधेश चौधरी, प्रवीण कुमार, मो. अब्दुल्लाह, अजय कुमार राय, उमेश राय, संजीव कुमार, रामबाबू सिंह, अशोक कुमार यादव, डब्लू पासवान सहित दर्जनों शिक्षक उपस्थित रहे।

शिक्षकों ने कहा कि सुरक्षित शनिवार के तहत इस तरह के कार्यक्रम बच्चों के जीवन को सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। नियमित मॉक ड्रिल और आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण से बच्चों में आपदा से निपटने की समझ विकसित होगी, जिससे वे न केवल स्वयं सुरक्षित रहेंगे बल्कि जरूरत पड़ने पर दूसरों की भी सहायता कर सकेंगे।

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