Sunday, January 18, 2026
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उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान से घटेगी मातृ मृत्यु दरस्क्रीनिंग, फॉलोअप और रेफरल प्रबंधन को लेकर शिवाजीनगर में स्वास्थ्य कर्मियों की समीक्षा बैठक

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शिवाजीनगर प्रखंड मुख्यालय स्थित मनरेगा भवन सभागार में शनिवार को उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग, नियमित फॉलोअप और बेहतर चिकित्सकीय प्रबंधन को लेकर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। यह बैठक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शिवाजीनगर की ओर से आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने की। इसमें प्रखंड के सभी स्वास्थ्य कर्मी, एएनएम, आशा फैसिलिटेटर तथा सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए।

बैठक को संबोधित करते हुए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने कहा कि ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (आरोग्य दिवस) के अवसर पर प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र पर गर्भवती महिलाओं की अनिवार्य रूप से स्क्रीनिंग की जानी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि स्क्रीनिंग के दौरान चिन्हित उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को प्रत्येक माह आयोजित प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा जाए, ताकि उन्हें गुणवत्तापूर्ण जांच, उपचार और आवश्यक परामर्श मिल सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि समय पर उपचार और निरंतर निगरानी से मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

स्वास्थ्य प्रबंधक अमानुल्ला ने बताया कि प्रत्येक माह की 15 और 21 तारीख को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष जांच व्यवस्था की गई है। सभी एएनएम और आशा फैसिलिटेटर को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र की चिन्हित गर्भवती महिलाओं को इन तिथियों पर अनिवार्य रूप से अस्पताल तक पहुंचाएं। उन्होंने यह भी बताया कि गंभीर एनीमिया से ग्रस्त गर्भवती महिलाओं के लिए आयरन सुक्रोज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है और आगामी 21 तारीख को पहले से चिन्हित महिलाओं को बुलाकर उपचार दिया जाएगा।

पिरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधि राकेश ठाकुर ने उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान, समय पर रेफरल और फॉलोअप प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने एएनएम से आग्रह किया कि टीकाकरण सत्र के दौरान सभी गर्भवती महिलाओं को आरोग्य दिवस में बुलाएं और उनकी संपूर्ण जांच सुनिश्चित करें। साथ ही आयरन और कैल्शियम गोलियों के नियमित सेवन और एनीमिया से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाने पर भी बल दिया।

बैठक में यूनिसेफ प्रतिनिधि बिक्रम कुमार चौधरी, डब्ल्यूएचओ प्रतिनिधि भास्कर झा, पिरामल फाउंडेशन से प्रीति, चिकित्सा पदाधिकारी अमोद ठाकुर सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित रहे। अंत में सभी ने यह संकल्प लिया कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान और समुचित उपचार सुनिश्चित कर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जाएगा।

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