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नोएडा बेसमेंट हादसा: बिल्डर गिरफ्तार, प्राधिकरण CEO हटाए गए, 5 दिन में SIT रिपोर्ट—पर सवाल अब भी बरकरार

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नोएडा, 20 जनवरी: उत्तर प्रदेश के नोएडा सेक्टर-150 में मॉल के बेसमेंट में भरे पानी में डूबकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। नोएडा पुलिस ने नामजद बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संज्ञान लेने के बाद नोएडा प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम. को पद से हटाकर प्रतीक्षारत कर दिया गया है। इसके साथ ही पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की गई है, जो पांच दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेगी। हालांकि, अभी भी बड़ा सवाल बना हुआ है कि हादसे के लिए जिम्मेदार अन्य अधिकारियों और एजेंसियों पर कार्रवाई कब होगी।

क्या है पूरा मामला?

सेक्टर-150 स्थित एक मॉल के बेसमेंट के लिए की गई खुदाई में भारी मात्रा में पानी भर गया था। इसी पानी में रविवार को सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता डूब गए, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना के समय उनके पिता भी मौके पर मौजूद थे, जिससे यह मामला और गंभीर हो गया। हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे।

पुलिस कार्रवाई: दो बिल्डर कंपनियों पर FIR

नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने रविवार को एमजे विशटाउन और लोटस ग्रीन नामक दो बिल्डर कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इसके बाद मुख्य आरोपी बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस का कहना है कि मामले में अन्य जिम्मेदारों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

सीएम योगी का कड़ा रुख, CEO हटाए गए

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर सख्त नाराजगी जताते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद शासन ने नोएडा प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम. को पद से हटाकर प्रतीक्षारत कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री इस बात से बेहद नाराज थे कि युवक अपने पिता के सामने डूबता रहा, लेकिन प्रशिक्षित बचाव दल ने पानी में उतरने से परहेज किया।

तीन सदस्यीय SIT गठित

मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के लिए मेरठ जोन के एडीजी भानू भास्कर के नेतृत्व में तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। इसमें शामिल हैं:

  • मेरठ के मंडलायुक्त भानू चंद्र गोस्वामी
  • पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर अजय वर्मा

यह टीम पांच दिनों के भीतर अपनी जांच पूरी कर मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपेगी। जांच में यह देखा जाएगा कि किस स्तर पर लापरवाही हुई, बचाव दल ने समय पर कार्रवाई क्यों नहीं की और प्राधिकरण ने खतरनाक खुदाई को लेकर पहले से कदम क्यों नहीं उठाए।

पूरे यूपी में हादसा संभावित क्षेत्रों की पहचान

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि पूरे उत्तर प्रदेश में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को चिह्नित कर तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। उन्होंने प्राधिकरण, दमकल विभाग, पुलिस और एसडीआरएफ की भूमिका की भी समीक्षा करने को कहा है।

प्राधिकरण पहले भी सीएम के निशाने पर

यह पहली बार नहीं है जब नोएडा प्राधिकरण मुख्यमंत्री के निशाने पर आया है। कुछ दिन पहले एनएमआरसी के कैलेंडर में केवल सीईओ की तस्वीर होने पर सीएम नाराज हुए थे, जिसके बाद प्राधिकरण के ओएसडी महेंद्र नाथ को भी प्रतीक्षारत कर दिया गया था।

अदालत से जुड़े पहलुओं पर भी होगी जांच

एसआईटी को निर्देश दिया गया है कि जांच के दौरान सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों का विशेष ध्यान रखा जाए, क्योंकि यह मामला स्पोर्ट्स सिटी प्रकरण से भी जुड़ा है, जो अदालत में विचाराधीन है।


आगे क्या?

हालांकि बिल्डर की गिरफ्तारी और सीईओ को हटाना बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है, लेकिन स्थानीय लोग और पीड़ित परिवार अब भी यह जानना चाहते हैं कि क्या केवल कुछ अधिकारियों पर गाज गिरेगी या फिर पूरे सिस्टम की जवाबदेही तय होगी। आने वाले दिनों में SIT की रिपोर्ट इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।

(यह रिपोर्ट तथ्यात्मक जानकारी पर आधारित है। आगे की कार्रवाई SIT की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।)

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