Thursday, July 30, 2026
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गुरु पूर्णिमा पर रन्ना मठ में उमड़ी श्रद्धा की भीड़, महंत रामायणी रामकृष्ण दास से लिया आशीर्वाद

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शिवाजीनगर (समस्तीपुर)। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर शिवाजीनगर प्रखंड के दहियार रन्ना पंचायत स्थित श्री राम जानकी बड़ी ठाकुरबारी रन्ना मठ में बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह के साथ गुरु पूर्णिमा महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। सुबह से ही मठ परिसर में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। गुरु पूजन, धार्मिक अनुष्ठान और आशीर्वाद कार्यक्रम में शामिल होकर श्रद्धालुओं ने गुरु परंपरा के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त की।

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर मठाधीश महंत रामायणी रामकृष्ण दास का श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। भक्तों ने पुष्प अर्पित कर, माल्यार्पण एवं चरण वंदन करते हुए उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान पूरे मठ परिसर में भक्ति गीत, मंत्रोच्चार और गुरु वंदना से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

गुरु पूर्णिमा पर रन्ना मठ में उमड़ी श्रद्धा की भीड़, महंत रामायणी रामकृष्ण दास से लिया आशीर्वाद

अपने आशीर्वचन में महंत रामायणी रामकृष्ण दास ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। गुरु ही व्यक्ति को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान, सत्य, सेवा और संस्कार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने समाज में प्रेम, सद्भाव, सेवा और नैतिक मूल्यों को अपनाने का संदेश देते हुए सभी श्रद्धालुओं से मानवता की सेवा को जीवन का उद्देश्य बनाने का आह्वान किया।

इस धार्मिक आयोजन में शिवाजीनगर के अलावा बहेरी, बिभूतिपुर, बेगूसराय, दरभंगा, खगड़िया, सहरसा सहित विभिन्न जिलों और प्रखंडों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। दिनभर धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला चलता रहा, जबकि देर शाम आयोजित सांस्कृतिक एवं संस्कृत कार्यक्रम श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना। धार्मिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को भाव-विभोर कर दिया।

कार्यक्रम में शिक्षक दशरथ सिंह, त्रिभुवन कुमार, कन्हैया कुमार, संजय सिंह, निरूपण सिंह, चंद्रशेखर, मदन सिंह, रेणु कुमारी, विमला देवी, रेणु देवी, राधा देवी, पूनम देवी और कंचन देवी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर गुरु पूजन किया और आशीर्वाद प्राप्त किया।

आयोजन को सफल बनाने में मठ से जुड़े सेवकों एवं स्थानीय ग्रामीणों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। श्रद्धालुओं ने इसे भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा, सामाजिक एकता और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने वाला प्रेरणादायी आयोजन बताया। पूरे दिन मठ परिसर में श्रद्धा, अनुशासन और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला।

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